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सोनपुर, बिहार
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2026-07-28 01:11:04
# सोनपुर, बिहार सोनपुर (𑂮𑂷𑂢𑂣𑂳𑂩) भारत के बिहार राज्य के सारण ज़िले में स्थित एक शहर है। यह गण्डकी नदी और गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। वर्ष 1991 में सोनपुर को अनुमंडल का दर्जा मिला। वर्ष 2002 में सोनपुर नगर पंचायत गठित हुआ। सोनपुर में डाकबंगला मैदान है। सोनपुर अनुमंडल के अधीन पाँच प्रखंडों- दिघवारा, सोनपुर, परसा, मकेर और दरियापुर- के हजारों गाँवों में रहने वाले लाखों लोगों को आने वाले समय में निर्बाध बिजली का लाभ मिलेगा। पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत डेरनी, रमसापुर व अकिलपुर में विद्युत सब स्टेशन बनाये जायेंगे। शीतलपुर सब विद्युत ग्रिड से दिघवारा, दरियापुर, परसा, अकिलपुर, शीतलपुर, नयागांव व डोरीगंज विद्युत सब स्टेशनों को तक बिजली की सप्लाइ होती है। सोनपुर के दियारा क्षेत्राें का अब तक समुचित विकास नहीं हो सका है। बाढ़ की विभीषिका लोगों को झेलनी पड़ती है। अकिलपुर दियारे में बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी है। एम्स दीघा एलिवेटेड रोड (12.4 किमी लंबा ), गंगा पाथ वे (21.1 किमी) और जेपी सेतु (4.5 किमी)- गांधी सेतु से मिलकर यह एक ऐसा थ्रू वे(threeway) बनाएगा, जिससे सोनपुर की तरफ से आसानी से पश्चिमी पटना, फुलवारीशरीफ और एम्स पटना पहुंच जायेगा। इसके बन जाने से दीदारगंज, पटना सिटी, गुलजारबाग, व गायघाट जैसे सुदुर पूर्वी क्षेत्र के व्यक्ति को दीघा, दानापुर, खगौल, फुलवारीशरीफ, एम्स व जानीपुर जैसे सुदुर पश्चिमी क्षेत्रों में जाने-आने के लिए गांधी मैदान या पटना जंक्शन आने-जाने और शहर की मुख्य ट्रैफिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 2011 की जनगणना के अनुसार, सोनपुर नगर पंचायत की जनसंख्या 37,776 है। सोनपुर प्रखंड की आबादी 232,340 थी। पुरुषों की आबादी का 53% और महिलाओं की संख्या 47% है। सोनपुर में औसत साक्षरता दर 60% है, जो राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक है: पुरुष साक्षरता 70% है और महिला साक्षरता 48% है। सोनपुर में, 16% जनसंख्या 6 वर्ष से कम उम्र के हैं। सोनपुर का क्षेत्रफल 159.65 वर्ग किमी है। सोनपुर में विश्व का सबसे बड़ा - सोनपुर पशु मेला लगता है। यहाँ खासकर पशु ही नहीं अन्य सामानों की भी खरीद-बिक्री की जाती है। यह मेला नवम्बर में पटना के उसपार लगता है। यहाँ पर गाय, भैंस, बैल, बकरी, हाथी, घोड़ा इत्यादि बड़े पैमाने पर मिलते हैं। दूर-दूर से खरीद एवं बिक्री के लिए यहाँ पर लोग आते हैं। इस मेले की खूबी यह है कि चाहे छोटा सामान हो या बड़ा, सब कुछ आसानी से मिल जाता है। यहाँ पर व्यापार करने के लिए दूसरे देश से भी लोग आते हैं। विदेशी सामान भी यहाँ आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। सन् 1803 में रॉबर्ट क्लाइव ने सोनपुर में घोड़े के बड़ा अस्तबल भी बनवाया था। 2001 में, सोनपुर मेला में लाया गया हाथियों की संख्या 92 थी, जबकि 2016 में 13 हाथियों ने इसे मेले में बनाया, केवल प्रदर्शन के लिए, बिक्री के लिए नहीं। 2017 में, मेले में 3 टस्कर था। सोनपुर मेला में भू-राजस्व विभाग का स्टॉल से बिहार के सभी राजस्व ग्रामों का डिजिटल मानचित्र 150 रूपये मात्र सरकारी शुल्क के द्वारा कोई भी नागरिक तीन मिनट के अन्दर प्राप्त कर सकते हैं। यह कार्य राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र पटना के तकनीकी सहयोग के द्वारा किया गया है। समय के बदलते प्रभाव के असर से हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला, पशु बाजारों से हटकर अब आटो एक्स्पो मेले का रूप लेता जा रहा है। पिछले कई वर्षों से इस मेले में कई कंपनियों के शोरूम तथा बिक्री केंद्र यहां खुल रहे हैं। मेले में रेल ग्राम प्रदर्शनी लगी। रेलग्राम में टॉय ट्रेन चलाई जा रही। सोनपुर मेले के प्रति विदेशी पर्यटकों में भी खास आकर्षण देखा जाता है। जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस एवं अन्य विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए स्विस कॉटेजों का निर्माण किया जाता है। पर्यटकों को पटना एयरपोर्ट से सोनपुर मेला आने व जाने के लिए प्रीपेड टैक्सी भी उपलब्ध कराई जायेगी। हरिहर क्षेत्र 2017 सोनपुर मेला 32 दिनों का होगा। सोनपुर मेले का उदघाटन इस बार 2 नवंबर को तथा समापन 3 दिसंबर को किया जाएगा। मेला में नौका दौड़, दंगल, वाटर सर्फिंग, वाटर के¨नग सहित विभिन्न प्रकार के खेल व प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा।
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